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“I want to pacify God. The Almighty is upset with me.

To hold such a belief is like holding a can of water and attempting to appease the ocean by offering that water to it, hoping that with so much water, the ocean will feel overwhelmed and it will overflow. Dear Shiv Yogi, let me inform you that the nature is beyond limitations and confinement. Same goes for Shiva. He is beyond good or bad.

If life is taking an untoward course, replete with misery and suffering, it is my own doing, my own misdeeds. So it isn’t as if appeasing the God will spell the end of misery. There is nothing to make God happy about. God is beyond happiness and sadness. Shiva wants well for you. Isn’t having a living Guru a proof of his unconditional love and mercy? The gates of wisdom of Advait Sri Vidya have been opened for you. What greater a testimony can there be of God’s regard for you?

They key to tiding over the hurdles of life is to have a feeling of gratitude towards whatever you receive and a routine of meditation and penance. This is what a Shiv Yog life is all about. This emotion and this lifestyle habit alone will be facilitators of nullification of negativity.”

जीवित गुरु आपके लिए शिव में प्रेम का प्रमुख प्रमाण है

“मुझे अनंत को खुश करना है| शिव मुझसे प्रसन्न नहीं हैं|

ऐसी बातें बोलना ऐसा है जैसे एक लोटा जल लेके कहना की समुद्र मुझसे रूठ गया है और मैं समुद्र को प्रसन्न करने के लिए एक लोटे जल से समुद्र को और जल से भरकर प्रसन्न कर दूंगा| हे शिवयोगी मैं तुम्हें बता दूं कि प्रकृति तो अनंत है| शिव तो अनंत है| शिव तो निर्गुण है| जीवन में यदि बुरा हो रहा है तो यह मेरे ही कर्म हैं जो दुःख और संताप का कारण बने हुए हैं| तो ऐसा नहीं है कि शिव को प्रसन्न करने से दुःख दूर हो जाएंगे| शिव तो तुमसे अनंत प्रेम करते हैं, तभी तो आज तुम्हें जीवित गुरु का सानिध्य प्राप्त हो रहा है, अद्वैत श्री विद्या साधना की दीक्षा से अनुग्रहित किया जा रहा है| जीवन में साधना करो, धन्यवाद करो| यह दिव्य कर्म ही, यह भाव ही तुम्हारा बेड़ा पार करेंगे| यही तो नकारात्मक ऊर्जा का विसर्जन करने में सहायक सिद्ध होंगे|”