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“जो मनुष्य केवल लेने का भाव रखता है वह एक ऐसे किसान की भाँती है जो की अपनी फसल को काट चुका है और फिर उस धरती पर विषैले पदार्थों का छिड़काव कर उसे बंजड़ बनाने पर तुला है|”