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शिवयोग प्रति प्रसव साधना है आत्मा रुपी बीज को सही प्रकृति देने की प्रक्रिया;प्रति प्रसव का साधना कक्ष है जैसे आत्मा की व्यायामशाला

नमः शिवाय! मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के पीपल्स मॉल में शनिवार को शिवयोग की प्रति प्रसव साधना का आगाज़ करने पहुँचे सिद्ध गुरु अवधूत शिवानंद के सद्शिष्य और सुपुत्र – युवा संत आचार्य ईशान शिवानंदजी|

साधना से पूर्व प्रवचन के दौरान ईशानजी ने ऋषियों की इस साधना पद्धति का महत्व समझाते हुए शिविर की पृष्ठभूमि रखी| उन्होंने कहा:”यह साधना कोई आविष्कार नहीं है| यह कर्म काटने की प्राचीनतम साधना शैली है| इसको करने से आने वाले शरीर और चेतना में परिवर्तन की तुलना प्रकृति के एक उदहारण से की जा सकती है| जिस प्रकार एक बीज को पृथ्वी में बोने के बाद उसके बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थिति चाहिए और इसके अभाव में वह बीज बीज ही रह जाता है, उसी प्रकार आत्मा रुपी बीज के विकास के लिए सही प्रकृति, सही तत्वों का होना अत्यवाश्यक है| शिवयोग की प्रति प्रसव साधना आत्मा के लिए एक अनुकूल दशा प्रदान करता है| ऐसे भी कह सकते हैं कि प्रति प्रसव आत्मा का अखाड़ा है जहाँ सूक्ष्म कोशिकाएँ और मांसपेशियों की वर्जिश होती है|

और जब आत्मा का विकास होता है तो नकारत्मकता एक बाहुबली के समक्ष कमज़ोर व्यक्ति के समान थर थर काँप कर परे हट जाती है क्योंकि उसे भय हो जाता है अपनी पहचान खो जाने का|”

इस अवसर ईशानजी ने भोपाल में शिवयोग साधना शिविर संभव होने पर ख़ुशी ज़ाहिर की और ध्यान व साधना में अंतर बताते हुए बताया कि ध्यान एक  तकनीक जो की किसी से सीख कर करा जा सकता है| वहीं, साधना एक इंद्रियों को नियंत्रित करने की शैली है जो की गुरु के सानिध्य में और गुरु की छत्रों छाया में, उसी की तपोअग्नि के आभामंडल में रह कर कृपा समान ग्रहण की जा सकती है|

ईशानजी के प्रारंभिक दिवस पर दिए प्रवचन में उन्होंने ऋषि परंपरा से मिली साधना शक्ति का विवरण किया और बताया कि शिवयोग शक्ति के प्रवाह से कैसे प्रति प्रसव साधना का साधक कर्मों का विसर्जन करने में सक्षम होता है|

अंत में युवा पीढ़ी के लिए उदहारण ऋषि पुत्र ईशानजी ने बताया कि क्यों संत समाज में केवल शिवयोग संत ही अपनी साधना के गहनतम रहस्यों के खजाने को खोलते हैं| “शिवयोगी गुरु इस बात से अवगत है कि वह स्थाई नहीं है, वह निरंतर विकसित होता रहता है, वह अनंत है| तो यदि अनंत से कुछ हिस्सा बाँट दिया जाए तो अनंत को कोई कमी महसूस थोड़ी होगी| शिवयोगी इस तथ्य से अपरिचित नहीं है कि यदि शिव अनंत है तो उसकी कृपा अनंता है,” उन्होंने पंडाल में मौजूद साधकों को सूचित किया|