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नमः शिवाय! सोमवार को भोपाल के पीपल्स मॉल में शिवयोग एडवांस प्रतिप्रसव शिविर के तीसरे दिन का अनुष्ठान करने पधारे आचार्य ईशान शिवानंदजी ने अपने प्रवचन में गुणात्मक जीवन जीने पर ज़ोर दिया|

यह उन्होंने इन शब्दों में ज़ाहिर किया:
“नीरस जीवन तो हर कोई जी रहा है| ज़रूरतों की पूर्ति के पीछे तो सभी भाग रहे हैं| ख़ुशी तो हर किसी को अपने दायरे से बाहर नज़र आती है| मैं यह पूछना चाहता हूँ की ऐसे जीवन में खुशी किधर है? संतुष्टि किधर है? फोन ले लिया लाखों का किन्तु बात करने वाले वही चार लोग, खाना लेना है बहुत सारा किन्तु पाचन शक्ति है नहीं, धन चाहिए और अधिक किन्तु जितना है उसको भोगने की क्षमता है नहीं और ऐसे कितने उदहारण हैं जो सिद्ध करते हैं कि एक गुणात्मक जीवन होना बहुत ज़रूरी है| बनावटी जीवन से दूसरों की वाह-वाही तो मिल जाएगी पर खुशी कभी नहीं मिल पाएगी| बरकत होगी भी तो ख़ुशी नहीं होगी| इसलिए मैं बताना चाहता हूँ की जीवन में स्वाद होना वहुत ज़रूरी है| स्वाद का एहसास करने लायक इंद्रियों की क्षमता चाहिए है| शिवयोग की साधना यही स्वाद ज़िन्दगी में भरेगी|”

भारतीय हीलिंग के जन्मदाता सिद्ध गुरु अवधूत शिवानंद की दिव्य संतान ईशानजी ने यह भी बताया कि यदि कोई एक शिवयोग साधक से यह पूछे की तुम साधना क्यों करते हो तो उत्तर ऐसा हो की साधना मेरी ज़रुरत ही नहीं, मेरा शौक है, मेड़ी शक्ति है, मेरी दौलत है, इसे मैं बड़ी खुशी से एक संपत्ति समझता हूँ और निरंतर विकसित होने को अपना जीवन लक्ष्य मानता हूँ| “यह है शिवयोगी की सोच,” उन्होंने कहा|