या देवी सार्वभुतेषु मातृरूपेण संस्थिता

2016-11-25T09:48:09+00:00November 5th, 2016|Uncategorized|

जब तक मेरी स्वयं की संतान नही हुई, मैं कभी अपनी माँ की भावनाओं को सही से समझ न पाया| मेरे आदर्श सदा से पुरुष योद्धा रहे जो की मैदान-ए-जंग में हट्टे-कट्टे और अ आक्रामक रहे| तब के समय में मैं प्रकृति की सूक्ष्मता को ग्रहण करने में विफल रहा| मैं हमेशा पेड़ को मोटे तने [...]

THE REAL GODDESS

2016-11-25T09:50:46+00:00November 5th, 2016|Uncategorized|

I never really understood my mother till the time I had my own child. My heroes were always men, always the one in the battlefield strong and aggressive. I could never back then understand the subtleties of nature for I always looked at the strong hard tree not realising that even the sky touching tree comes [...]