शिवयोगी के लिए करवा चौथ का महत्व

//शिवयोगी के लिए करवा चौथ का महत्व

शिवयोगी के लिए करवा चौथ का महत्व

karwaमैं हमेशा से भगवान शिव और माँ पार्वती के चित्रों को देख कर सोचता था की क्यूँ महादेव एक भिक्षु की भाँति रहते हैं और माँ पार्वती गहनो और बेहद्द सुंदर वस्त्रों से सुसज्जित| किंतु यह विचार आने बंद हुए जब मेरा स्वयं का विवाह हुआ क्योंकि हर नारी की तरह मेरी भागवन भी खरीददारी करती, सजती सावर्ती और शृंगार करती|

शायद मैं ही दुखियारा था, अपनी अर्धांगिनी की तुलना में और जब मैं उससे पूछता की तुम श्रृंगार क्यूँ करती हो तो उसका जवाब सराहनीय होता| वे कहती, प्रकृति में सभी वस्तुओं कितनी सुंदर हैं, हम अपने ईष्ट को भी निखरा हुआ दिखाते हैं और क्या फ़ायदा गहनों से लदे ईष्ट का जब पुजारी ही ग़रीब, उजड़ा और उखड़ा सा लगे?

मैं अपने से गर्व महसूस करता यह सब सोच के की मैं अपनी धरम पत्नी के लिए क्या कुछ करता हूँ – मैने उसको रहने के लिए घर दिया, खरीदारी करने का साधन दिया, एक सुंदर परिवार दिया और इस सब को सोचने के बाद मुझमें अहंकार आ जाता, क्रोध आ जाता की देखो मेरा तुमको प्रसन्न रखने का प्रयास कितना काबिल ए तारीफ है और उसे कितना खुश होना चाहिए की मेरे जैसा कोई उसे पति मिला|

दोहरे मापदंड सच कहें तो| हर मर्द को सुंदर स्त्री से आकर्षण होता है किंतु जब उनकी पत्नी सजने सँवरने लगे तो वह पति से खड़ूस पिता का रूप धारण कर लेता हैं| उद्यमी महिलायों को हम खूब पसंद करते हैं किंतु अपनी मूर्खता से हम पत्नी से भेंट होने पर बाहर आते हैं| तब तो हम अड़ियल और सड़ियल हो जाते हैं| हम तुलना से झिझकते हैं किंतु फिर भी हम अपनी अर्धांगिनी को तुलना के कटघरे में डालने से पहले एक बार भी नही सोचते|

हम माँ काली को उनके चाँदी रूप के लिए पूजते हैं, मा लक्ष्मी को उनकी संपन्नता के लिए पूजते हैं और माँ सरस्वती को उनके ज्ञान के लिए पूजते हैं| इसके बावजूद सवाल यह करना चाहता हूँ की हम में से ऐसे कितने लोग हैं जो अपनी पत्नी में यह सभी गुण होने पर खुशी मनाएँगे?

पुरुष सरल योद्धा हैं, उनके युद्ध भी सरल हैं| हमारे लिए तो सभी कुछ प्रत्यक्ष है| किंतु जब मैं स्त्री की बात करता हूँ तो मैं देखता हूँ की उसके जीवन में सच्चाइयों की भी परतें हैं| मैं एक स्त्री की रचना को समझता हूँ| मानो जैसे भगवान ने मुश्किल खिलौना ज़्यादा होसियार को दे दिया हो, यह जानते हुए की एक स्त्री में ही धैर्य है जीवन देने का| मैं देखता हूँ एक महिला का एक घर से दूसरे घर में संक्रमण मानो सुख के दायरा उसके लिए हो ही ना|

मैं एक महिला का विश्वास देखता हूँ जिसका प्रमाण है सबसे असभ्य समाज में उनका पनप पाना| ऐसे अनेकानेक तथ्यों के आगे मैं झुकता हूँ| तो चाहे मैं कितना भी स्त्री को दे दूं, स्त्री ने तो मेरा जीवन ही मुझे दे दिया है, मुझे जन्म भी तो एक स्त्री ने दिया है|

आज मैने अपनी पत्नी से पूछा आप मेरे लिए करवा चौथ क्यूँ रख रही हैं क्यूंकी मैं भी मीडीया से प्रभावित हो गया था जो की हमारे रीति रिवाजों पर सवाल उठा रही थी|

मैने उससे पूछा की क्या तुम यह मेरी दीर्घ आयु के लिए करती हो? वो बोली नही, मैं तो आपकी लंबी आयु के लिए प्रति दिन वर मांगती हूँ|

तो मैने प्रश्न किया की क्या तुम यह सब भगवान को प्रसन्न करने के लिए कर रही हो? वह बोली नही तो| वह भगवान ही क्या जिसे मनाने की ज़रूरत पड़े| मतलब आप कहना चाहते हैं की भगवान रुष्ट भी हो सकते हैं?

तो मैने उससे पूछा की यह व्रत क्या तुम रीति रिवाज़ों का पालन करने हेतु रख रही हो? वह बोली ज़बरदस्ती की हुई कोई भी चीज़ अपनी सुंदरता खो देती है जैसे एक नकली पुष्प, जिसमें खुशबू ही न हो|

तो थक हार के मैने उससे पूछा की आख़िरकार आप यह व्रत क्यूँ रख रही हो? उसका उत्तर सरल था – जैसे हम धर्म के नाम पर, संस्कृति के नाम पर बहुत सारे कर्म कांड करते हैं, यह भी उन्ही का मान करने का एक ज़रिया है| मैं यह इसलिए रखती हूँ क्योंकि इसे करने से मुझे अच्छा लगता है, मेरा ज़्यादा ध्यान लगता है और सबसे अहम बात – मुझे लगता है की आपको सर्वश्रेष्ठ मिलना चाहिए|

मैं उसके उत्तर से भौचक्का रह गया| उसने मेरा दिल पुनः जीत लिया|

क्या मैं सर्वश्रेष्ठ का अधिकारी हूँ? तो फिर वह किस आचरण की सुपात्र है? हम तो उस संसकृति से हैं जिसमें स्वयंवर में एक पुरुष स्त्री का मन जीतता है अपनी कला से, शक्ति से, क्षमता से, प्रतिभा से, एक संस्कृति जहाँ पुरुष तो भगवान होंगे किंतु स्त्री ज़रूर भगवती है|

मैने सोचा की अगर मैं अपनी पत्नी से उम्मीद रखता हूँ तो क्यों ना मैं भी उसे कुछअच्छा ही दूं? शायद यह हमारी ही ग़लती है| आज की तारीक़ में हम जो भी हीरो देखते हैं उसके लंबे, बिखरे बाल, रस्यं खाए हुए, बिगड़ैल, कामकल और अपनी बिगुल बजाने वाले देशों की आबादी से ज़्यादा| बड़े पर्दे पर हर हीरो सर्वश्रेष्ठ का ही सुपात्र है किंतु हेरोइन किस चीज़ की सुपात्र है? हमारी पत्नियाँ किस तहज़ीब लायक हैं?

सभी पुरुषों से आग्रह करूँगा की आइये आज संकल्प लें की हम सुपात्र बनेंगे|

इस करवाचौथ पर जैसे मेरी श्रीमती मेरे लिए दुआ करती है, मैं उससे वायदा करता हूँ की मैं उसे उपहार में स्नेहपूर्वक एक स्वस्थ और सुडोल शरीर प्रदान करूँगा और संकल्प लेता हूँ की सबसे ऊँची पर्वत शृंखला पर चड़ूँगा और समुद्रों की गहराइयों तक तैर के जाऊँगा, कुछ नही तो इसलिए की मैं अपनी बीवी को गरवान्वित कर सकूँ|

अपनी भार्या को वचन देता हूँ की मैं उसकी विचित्रता को सराहूँगा, उसके अनूठेपन को स्वीकारूँगा जो की उसे लाखों में एक बनाती हैं|

मैं कसम खाता हूँ की मैं अपने बच्चे की माँ का आदर करूँगा, ठीक उसी तरह जैसे मैं इस सृष्टि की जननी का आदर करता हूँ, क्यूंकी हो सकता है भगवती काल्पनिक हो किंतु मेरे जीवन में स्त्री ने तो जीवन का ही निर्माण प्रत्यक्ष किया है और करती रहेगी|

मैं अपनी प्राण वल्लभ को वायदा करता हूँ की आज से अपने हर दिन का कम से कम एक घंटा समर्पित करूँगा और इस घंटे में कोई फोन पे बात नहीं, लॅपटॉप पे काम नही और टीवी देखना नही|

मैं आज से प्रतिज्ञा करता हूँ की मैं अपनी पत्नी की तुलना किसी और से नही करूँगा – न ही किसी और स्त्री से न ही मेरी माँ से और उसे अपने दिल से समान्नित करूँगा, कर्मों से समान्नित करूँगा, केवल शब्दों से नही|

मैं वायदा करता हूँ की मैं दूसरों के समक्ष अपनी बीवी की हमेशा तारीफ करूँगा क्यूंकी यह मेरी यात्रा है, मेरा रिश्ता है और इस यात्रा में मुझे औरों से कुछ लेना देना नही, औरों के लिए तो यह सिर्फ़ एक मसालेदार गप शप है|

मैं प्रभु से मिले सभी उपहारों को उसे समर्पित करूँगा, उसकी आत्मा को समर्पित करूँगा क्यूंकी संसार तो मेरे मन से जुड़ा है किंतु वो दिल से भी जुड़ी है|

मैं वफ़ादार होने का प्रण लेता हूँ| 

किंतु सबसे ज़रूरी बात, मैं अपनी पत्नी को मेरे साथ सुखी रहने के लिए आशीर्वाद देता हूँ और प्रार्थना करता हूँ की मैं और वो, हम दोनों शिवयोग के मार्ग पर साधना करें और आगे बढ़ें|

मैं दुआ करता हूँ की हम जीवन पर्यंत एक दूसरे का हाथ पकड़ कर चलें, तब तक जब तक हमारा उस शिव में लीन होने का समय नही आअता|

 

मैं तहे दिल से उसके लिए प्रार्थना करता हूँ|

सभी युवा पुरुषों से कहूँगा की लड़कपन छोड़िए, महिलाएं आपका खिलौना नही हैं और इस वाद और विवाद में मत पढ़िए की उन्हें करवा चौथ रखना चाहिए की नही| मर्द बानिए और अपनी क्षमता शब्दों से नही कर्मों से दिखाइए|

आज अपने से पूछते हैं की पुरुष होने के नाते हम क्या कर सकते हैं? और इसमें केवल भोजन लाने से बात नही बनेगी क्यूंकी भोजन तो छोटे से छोटा कीड़ा भी ला देता है, घर और सुरक्षित वातावरण तो वह भी निर्मित कर लेता है| क्या मुझे ज़्यादा नही करना चाहिए क्यूंकी मैं तो स्वयं भगवान की परछाई से ही बना हूँ|

एक शिवयोगी के लिए करवा चौथ केवल एक व्रत नही है|

यह वह समय है जब आप अपने विवाह पर किए वचनों को पुनः जियें, यह वह समय है जब पति अपनी पत्नी को ऐसे समर्पित कर दे जैसे भगवान शिव ने माँ पार्वती को समर्पित कर दिया हो|

यह वह समय है जब स्त्री हमारी दीर्घ आयु की कामना कर रही हो, किंतु हम अपने जीवन की गुणवत्ता को बड़ाएं|

यह दिन है दोनों के लिए उत्सव मनाने का

मेरी भगवती और मेरे शिव

बाबा जी और गुरु माँ

मैं और मेरी अर्धांगिनी

और अब आप और आपकी धर्म पत्नी

सभी शिवयोगी साथ में इस पृथ्वी को प्रकाश मे बनाने के लिए

मेरा प्रेम और आशीर्वाद

नमः शिवाय

ईशान शिवानंद

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9 Comments

  1. vinay sharma October 19, 2016 at 9:51 pm - Reply

    Loved loved loved your post-Ishan Ji.I hope every woman on this earth is Luckey like the princess you are mentioning.Thanks very much for spreading this lovely message. I am very sure all male followers will learn to love and respect their better half.

    thanks again

  2. Akanksha Bajpai October 20, 2016 at 1:53 am - Reply

    It was really nice and I m so happy to read this, now I m sharing it.

  3. Sanjay Maheshwari October 20, 2016 at 7:49 am - Reply

    A festival is an occasion to be a reminder of filling every moment of this life with festivity, to make it a song, fill it with music and allow it to vibrate all the time with in and to hum it all along at each & every step.

  4. den October 20, 2016 at 8:46 am - Reply

    Namah shivaay ishanji , which place is that in above image ? place is looking so beautiful 🙂

    Thanks .

  5. mrs neeru kanotra October 20, 2016 at 8:47 am - Reply

    i m so so proud of u my son.i m blessed that i saw u.here i m crying.when r u coming.can u stay with us this time.just tears tears.bless me 2 fill swimming pool.in yr pure memory.at first years back i was reluctant 2 attend yr shivir.that u r so young.but the truth is katore pe katoraa betaa baap se bee goraa.cannot explain.my gratitude .sant naa hote aap jaise jagat mein to jal martaa sansaar.

  6. anushri shrihari patil October 20, 2016 at 9:19 am - Reply

    Ishan bhaiya you are great,my husband is already walk to your massage.namah shivay

  7. Sanjay Kumar DIXIT October 20, 2016 at 9:48 am - Reply

    good

  8. somendra pandey October 20, 2016 at 10:29 am - Reply

    Simply great thought. Namah shivay

  9. vijay shiv shiva October 26, 2016 at 3:24 pm - Reply

    namah shivay bhaiya…
    bahut dhanywad .. is adbhut jeevan ko jaanne ka marg prashast karne ke liye..namah shivay.

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