या देवी सार्वभुतेषु मातृरूपेण संस्थिता

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जब तक मेरी स्वयं की संतान नही हुई, मैं कभी अपनी माँ की भावनाओं को सही से समझ न पाया| मेरे आदर्श सदा से पुरुष योद्धा रहे जो की मैदान-ए-जंग में हट्टे-कट्टे और अ आक्रामक रहे| तब के समय में मैं प्रकृति की सूक्ष्मता को ग्रहण करने में विफल रहा| मैं हमेशा पेड़ को मोटे तने को देख के विस्मय से प्रसँन्न होता, इस बात से अनभिज्ञ के गगनचुंभी वृक्ष भी एक नन्ही कली से उत्पन्न हुआ है|

अपने सभी प्रिय नायकों पर नज़र डालें, सभी ईष्ट, देवताओं पर दृष्टि डालें, अपने गुरु पर दृष्टि डालें और कभी यह सवाल करें की इन सब की जननी कौन है? किसने इन महापुरुषों को जन्म दिया? कौन इन महानुभावियो का पालन पोषण करता था जब यह अपनी गर्दन भी स्वयं न मोड़ पाते थे? उत्तर मिलेगा की हर काबिल और सफल पुरुष के पीछे स्त्री शक्ति का हाथ है और वह शक्ति है उसकी माँ|

जब मेरी भाग्यवान गर्भवती थी तो मैने प्रत्यक्ष अनुभव किया कि कैसे एक जननी अपना सब कुर्बान कर अपने शिशु के बारे में सोचती है, जब उस नन्ही-सी जान ने इस दुनिया की पहली किरण देखी भर भी नही होती|

कितना मनमोहक प्रेम रस है यह और वह भी कितना पवित्र| हम कहते हैं संतों का आदर होना चाहिए क्योंकि वे भगवान के प्यारे हैं और भगवान से प्यार करते हैं| लेकिन जब हम वात्सल्य रस को अनुभव करेंगे तो हम पाएँगे की एक माँ तो उसी पूजनीय संत की उपाधि के लायक है जो की भीतर के भगवान को अंतरसात कर चुका है| अब आप ही बताइए क्या एक माँ प्रथम गुरु का दर्जे के लायक नही?

मैने प्रसूति का असहनशील दर्द देखा है जब एक माँ  को अपना शरीर, मानो तोड़कर, इस ग्रह पर नई ज़िंदगी को लाना ही होता नही है बल्कि असहनीय पीड़ा को तत्क्षण भुला कर शिशु का पोषण करने में व्यस्त हो जाना होता है|

सच्ची वीरता, सच्चे शौर्य की कथा-कहानियाँ तो बहुत सुन ली किंतु मेरी पहली नायिका की कहानी तो बहुत समय से दबी रही|

मैं इस बात का साक्षी बना की कैसे एक माँ  को अपनी निद्रा, अपनी पहले का मस्त मौला जीवन का त्याग कर माता का कर्तव्या निभा कर जीवन का पालन पोषण करना होता है| किंतु एक महावीर की विपरीत, एक माँ  अपनी ममता की ढाल को नीचे नही कर सकती| एक माँ तो माँ ही रहती है बेशाक़ उसकी संतान उससे ज़्यादा तरिक्की कर जाए|

मैं अब शक्तिशाली हो गया हूँ और मैं अपनी देखभाल  करने के काबिल हूँ किंतु मेरी माँ की आँखों में अभी भी मेरे लिए वही चिंता, वही करुणा है, मानो मैं कभी बड़ा हुआ ही नही और ऐसे में मैं सोचता हूँ मैने ऐसे कौन से पुण्य किए होंगे की मैं ऐसे प्रेम का पात्र बना|

मेरी माँ के जगत में मैं दुनिया का सबसे बड़ा चमकता सितारा हूँ| उनकी दुआएं ही मुझे एक बेहतर इंसान बनने में सहायक बनती हैं|

तो आज जब यह बात कर रहा हूँ तो बताना चाहता हूँ की याद रखिए, की आपके जीवन में बहुत से रिश्ते हैं किंतु माँ का रिश्ता एक ही है| आपकी माँ ही आपकी पहली सखी है, पहली गुरु है और पहला प्यार भी है|

यदि आप अपनी माँ की दैहिक मौजूदगी का सौभाग्य रखते हैं, तो उनका सत्कार कीजिए, उनका मान सम्मान और उन्हें खूब लाड़ प्यार कीजिए| और यदि वे अपना देह छोड़ चुकी हैं तो उनकी आत्मा को श्रद्धांजलि देने हेतु अपने सद्कर्मों को सहयाक बनाएँ, उनके नाम पर पुण्य करें|

यदि आपके जीवन में गुरु या ईष्ट स्वरूप कोई हैं तो उनकी माँ का आभार व्यक्त करें क्योंकि उन्ही की वजह से आज इन महान ऊर्जाओं का निर्माण हो पाया, पृथ्वी पर उन्ही माताओं के कारण इन महान आत्माओं का प्रादुर्भाव हुआ|

आइए आज का दिवस अपनी माता के नाम करें| आपकी माता ही है जो की प्रकृति में निःस्वार्थ प्रेम का परम उदहारण हैं|

माता का प्रेम सच्चे प्रेम का झरोका है|

आज अपनी जीवन की सबसे विशेष नारी को अपनी चेतना की गहराइयों से “आभार का सलाम” करें|

आज करें, अभी करें|

यह नही कह सकते की कब तक उसका हाथ तुम्हारा हाथ थामे हुए है| तुम्हारी माँ, जब तक कर सकती है, और उसके बाद तक भी तुम्हें आशीर्वाद देती रहेगी|

क्यूँ उस पहर का इंतेज़ार करते हो जब तुम उसकी उपस्थिति को तरसोगे| आज का दिन ही क्यूँ ना उसके नाम कर दो?

जो भी इसे पढ़ रहा है, आपकी जो भी आयु है, जो भी धर्म है, जो भी रंग रूप है, यह जान लीजिए की आपकी माँ आपसे बहुत प्रेम करती है और आपके पास उन्हें इस पूरी पृथ्वी पर सबसे अधिक प्रसन्न करने का सौभाग्य प्राप्त है|

माँ ने ही हमें जन्म दिया और तुम ही वह वजह हो जिसके करके वह जी रही है|

अपनी माता को प्रेम कीजिए

अपनी माता को स्वीकार कीजिए

अपनी माता का धन्यवाद दीजिए

अपनी माता को आशीर्वाद दीजिए

और ऐसा करने पर आप अपनी ही सहायता करेंगे क्योंकि जब आप उन्हें स्वीकार करेंगे तो वास्तव में आप अपने को ही स्वीकार करेंगे क्योंकि क्या आपकी माँ आपके भीतर नही बसी?

मेरा प्रेम और आशीर्वाद

नमः शिवाय

2016-11-25T09:48:09+00:00November 5th, 2016|Uncategorized|

One Comment

  1. Hiren patadia November 5, 2016 at 8:19 pm - Reply

    Dhanyawad namah shivay

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