भूत से होके निकलेगी उज्ज्वल भविष्य की डगर

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भूत से होके निकलेगी उज्ज्वल भविष्य की डगर

भूत से होके निकलेगी उज्ज्वल भविष्य की डगर

अरावली हिन्दुस्तान की सबसे प्राचीनतम पर्वत श्रंखला है| हिमालय के पर्वत इसकी तुलना में अभी नन्हें शिशु हैं|

इन पर्वतों में एक अनकही चाहत है, अनदेखा आकर्षण है¦ आख़िरकार यह पर्वत उन सब घटनाओं के साक्षी रहे हैं जिनकी कल्पना भी नही की जा सकती| यह पर्वत पौराणिक काल से शौर्य और वीरता के, महान तपस्वी सिद्धों की गाथाओं के साक्षी रहे हैं| संतों की दासताएँ तो इतिहास के पन्नों में कहीं दबके रहा गयीं लेकिन इनकी एक झलक कवियों की कविताओं भर में रह गई है| संगीत, संगीत में ज्ञान जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलता चला आ रहा है|

अरावली के रेगिस्तानी संतों में एक अनोखापन है, एक दिव्य प्रेम है| असल में रेगिस्तानी संतों से बेहद शक्ति का लगातार प्रवाह महसूस होता है| इनका तो संसार कुछ अलग ही है, मानों और कोई दूसरा ही जहान, जिधर आकाश दूसरा है और पृथ्वी ऐसी की विवरण नही किया जा सकता, बस अनुभव किया जा सकता है और जहाँ से स्वयं भारतीय हीलिंग पद्धति के संस्थापक अवधूत शिवानंदजी आते हैं|

मैने अपने बचपन के हसीन पल इन टीलों की गोद में गुज़ारे हैं जहाँ मेरे पिता घोर तपस्या किया करते थे|

मेरी दिली इच्छा है की मैं शिवयोगियों को मेरे गुरु की इस तपोभूमि में लेकर जाऊँ, जो की इन प्राचींतम पर्वतों की गहराइयों में स्थित है|

एक गौशाला जो शिष्यों के कर कमलों से निर्मित हुई और जहाँ हम बहुत पहले रहा करते थे| हमारे ग्रंथों में इस चीज़ का उल्लेख है की जो साधक किसी गौशाला में तप करता है, वह अपना तपोबल अनंत गुना बढ़ाने में सक्षम होता है¦ मैं सभी शिवयोगियों को इस अद्भुत शक्ति का अनुभव दिलवाना चाहता हूँ|

इस साधना शिविर में मेज़बान होने के नाते यह कहना चाहूँगा की जो भी साधक इसमें शिरकत करेंगे, वे मेरे महमान होंगे और इनकी तादाद गिनी चुनी होगी| दुआ कीजिए की एक दिन ऐसा आए जब मेरे पास इतना सामर्थ्य हो की वे सभी इस शिविर में आ सकें जो मुझसे प्रेम करते हैं|

आशिर्वाद उन सभी को जो मेरे साथ इस दिव्य भूमि मे साधना करने वाले हैं|

मेरा प्रेम और आशीष
नमः शिवाय

By | 2016-12-02T09:45:22+00:00 December 2nd, 2016|Categories: Blog, Hindi|0 Comments

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