पितृ तर्पण के लिए पहले माता पिता का सम्मान करना सीखें

fathson

 

मैं अपने पिता से बहुत प्रेम करता हूँ|
मुझे उनके साथ रहने में बहुत आनंद आता है |
उनका एक अंश हमेशा मेरे साथ रहता है किंतु एक अंश मेरे भीतर रहता है, सदा ख़याल रखता है|

उनका जो अंश मेरे साथ रहता है वह मेरा बहुत ख़याल रखता है, मेरा मार्गदर्शन करता है और मुझसे बहुत प्रेम करता है| मैं यह प्रार्थना करता हूँ की वह अंश हमेशा मेरा हाथ पकड़े रहे किंतु मैं इस बात से अनभिज्ञ नही हूँ की ऐसा हमेशा नही रहेगा| तब भी मैं खुश हूँ की उनका एक अंश हमेशा मुझमें रहेगा क्योंकि मैं और कुछ नही, उन्ही का एक प्रतिबिम्ब हूँ और वे मेरे भीतर रहते हैं|

एक दिन ऐसा आएगा जब हम इस विरासत की आखरी कड़ी होंगे, अपने प्रियजनों की आखरी निशानी| बिल्कुल उसी तरह जिस प्रकार मेरा पिता अपने पूर्वजों की विरासत का उत्तराधिकारी है, एक विरासत जो हमारे सच्चे पिता तक जाती है| हमारा सच्चा पिता – शिव|

हम आज जो भी है वह इसीलिए हैं क्योंकि हमारे पूर्वज रहे थे, हमारे पूर्वजों की हिम्मत और वीरता, शूरता, श्रम और बुद्धिमाता ने यह निश्चित किया की उनकी वंशावली हम तक पहुंचे|

उन्होंने इतने युद्ध, इतनी आपदाएं और इतनी महामारियों से लड़कर आगे बढ़ने का साहस किया और इसमें सक्षम हुए| उनकी सर्वोपरि प्रेरणा – उनके अपनी उत्पत्ति के प्रति प्रेम| कौन थे वे? क्या सपने थे उनके? किन नदियों में उन्होंने तैरा था? किन रेगिस्तानों से वे गुज़रे थे?

इन सभी प्रश्नों के उत्तर हमारे पास नहीं हैं | किन्तु इस बात को जानकर भी दुखी न हुआ जाये क्योंकि हर बार जब आप स्वयं को देखते हैं तब आप उनको देखते हैं|

वह जीवित होते हैं जब हम जीवन में कुछ प्राप्त करते हैं, उनकी टीम को शाँति मिलती है, हर बार जब हम सीमा से पार आ पते हैं, उनको हमारे बलिदानों की परिभाषा समझ आती है क्योंकि याद रहे की आज उनका एक अंश हमारे में से ज़िंदा है और तब तक रहेगा जब तक हम हैं|

यह सब उसी दिन तक जब तक हम जीवित है और मरणोपरांत केवल हमारा वंशाणु ही रह जाएगा हमारे वंशजों में|

लेकिन वह क्षण अभी दूर है| अभी तो हम एक याद से ज़्यादा ही हैं| अभी तो हम जीवित हैं| अभी हमारा समय है| अपने माता पिता को मान सम्मान देने के लिए इंतज़ार क्यों करें? उनका पूर्वज बनने तक के काल की प्रतीक्षा क्यों करें? उनको दुलारने के लिए उनका केवल एक याद बनने तक का इंतज़ार क्यों करें? क्यों न उनके जीते जी ही ख़ुशी को अनुभव करें, उन्ही के साथ, साक्षात|

आइए आज से अपने समय का सदुपयोग करें वह बालक बनकर जो एक समय में हम हुआ करते थे, उनके साथ जो हमारे आदर के हमेशा योग्य हैं – हमारे बड़े बुज़ुर्ग| आखिरकार वह हमारे सम्मान रुपी तौफे के अधिकारी हैं| आज उनका मान सम्मान कर लीजिये जब वे हमारे साथ हैं और संकल्प करें की आगे चलकर भी केवल उनका सत्कार करेंगे जब केवल उनका अंश हमारे साथ रह जाएगा|

शिवयोग में हम तभी तो माता पिता को सर्वोपरि मानते हैं| भगवान ने हमें बनाया की नहीं यह हमें पता नहीं या हम निश्चितता के साथ नहीं कह सकते किन्तु यह आवश्यक ज्ञान है की हमारी रचना हमारे माता पिता ने की है और उनका मान सम्मान तो भगवान से भी अधिक होना चाहिए| उनको प्रेम और आदरपूर्वक रखना ही वास्तविक पूजा है | इसीलिए तो मेरे माता पिता के समक्ष मैं कुछ भी बनकर आऊं, उनके लिए तो मैं वही नन्हा मुन्ना हूँ और वही रहूँगा|

आज मैं आपसे आग्रह करता हूँ की आप अपने भीतर के बालक को जागृत कर अपने माता पिता को वह अपना बाल रूप एक उपहार सामान प्रदान करें| उनके साथ नांचे, गायें, उनके साथ खेलें, उन्हें गले लगाएं, उन्हें कुछ दें|

उनसे अभी संपर्क साधने का प्रयास करें|
आज का दिन उन्हीं के नाम हो|
वे आपके प्रेम के अधिकारों हैं|
वे आपके जीवन के इस दिवस का हिस्सा बनने के सुपात्र हैं|
आज वे आपके माता पिता होने के भाव को महसूस करने के योग्य हैं|

और यदि वह आज सितारों में कहीं चमक रहे हैं तो उनके नाम पर आज कुछ सुनेहरा कर डालें क्योंकि आपके पुन्य कर्म ही उनके लिए सर्वोत्तम श्रद्धांजलि हैं और याद रहे जब तक आप जीवित हैं, वह आप में कहीं न कहीं जीवित हैं|

मेरा प्रेम और आशिर्वाद
ईशान शिवानंद

तस्वीर – यह यादगार पल आज से १० साल पहले का है जब मैं मार्शल आर्ट की कक्षा से वापीस आया था और बाबाजी नीम-दातुन कर रहे थे| वे मेरी ओर देख कर हास्यपप्रद ध्वनियां निकालने लगे मानो जैसे ब्रूस ली दहाड़ रहा हो| इस माहौल में मैं बहुत खिलखिलाया और हम पिता-पुत्र में एक घंटे का आनंद बँटा| जानकारी के लिए यह तस्वीर मेरी माता ने खींची है|

2016-11-25T10:08:11+00:00September 28th, 2016|Hindi|

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