दूरी का ध्यान रखें

दूरी का ध्यान रखें
जैसे ही मैंने सागर में एक गहरी डुबकी लगाई, एक नई और खूबसूरत दुनिया मुझे पता चली। एक ऐसी दुनिया जहाँ कोई गुरुत्वाकर्षण नहीं, जहां मैं उड़ान और स्वतंत्रता की भावना के सबसे करीब जा सका। एक विदेशी दुनिया जिसमें मैं अंतरिक्ष में बहते हुए एक ग्रह के सामान था। आकाशगंगाओं के बीच के अंतरिक्ष के सामान इतना सारा खालीपन था वहाँ, और फिर अचानक न जाने कहाँ से तारों के प्रकार एक मछिलयों का समूह आया, अपने छोटे छोटे ग्रहों के साथ, अनंत घूर्णन में घूमते हुए, और उसे कोई एहसास न था की उसका क्या पद है, उसका क्या कृत्य है ब्राह्मण की विशाल मशीनरी में। मैं सचेत और उत्सुक महसूस करने लगा, जब मैं उन गहराईयों की खोज करने लगा, जितना मैं समर्थ था, मेरे हाथों के बल और मेरे फेफड़ों की सिमित क्षमता पर निर्भर होते हुए।तथ्य यह था कि चाहे कितना भी रहस्यमय या कितनी भी कृत्रिम निद्रावस्था उत्पन्न करने वाली जल की गहराइयाँ लगी, मैं वहाँ वास नहीं कर सकता था क्योंकि मैं सतह का जीव हूँ।
मेरी जिज्ञासा मुझे कितना भी नीचे खींच ले, लेकिन मेरे प्राण, जो कोशिकाओं में चल रहे वो मुझे समय समय पर सतह पर खींच लेते और उन सब में सबसे महत्वपूर्ण अनुभव था : सांस। सांस उपजीवन होने के साथ साथ मुझे जोड़ रहा था मेरे मूल तत्वों के साथ। वो डोर थी जिसे रोके हुए मैं गहरा और गहरा उत्तर उतर रहा था, उसके बिना मैं गहरी खाईयों में गायब हो जाता। तो चाहे मैंने जो भी देखा या जिस से भी मैं आकर्षित हुआ, यह अनिवार्य था की मैं सतह पर जाऊं, चाहे कुछ ही क्षणों के लिए ताकि मैं सांस ले पाऊं।
तो जीवन के साथ भी यही है, मेरे प्रिय। तुम एक उच्चतम आयाम के जीव हो, जो इस सतह पर खिंचे आये हो, अपनी जिज्ञासा के कारण। हो सकता है कि यह दुनिया अद्भुत और अजीब लगे, और तुम अपनी जिज्ञासा का क्षमण करने में व्यस्त हो जाओ, लेकिन उसे मत भूल जाना जिसका मूल महत्व है। जिस प्रकार से मुझे समय समय पर सतह पर आना पड़ता था वास्तविकता से जुड़ने के लिए, उसी प्रकार इंसान को सीखना चाहिए कि वो प्रकाश से कैसे जुड़े जब वो अच्छा महसूस ना कर रहा हो।
अगर रह जाए वो डूबने की अनुभूति जो प्रतिदिन बढ़ती जाए जैसे की तुम धीरे धीरे डूब रहे हो जब सारे दरवाज़े बंद होने लगे, तो इसका मतलब यह हुआ अपने जीवन की गहराइयों को खोजते हुए हमने छोड़ दी या भूल गए उस दिव्यता की डोर को|
परमात्मा तुम्हारे नसों में दौड़ता वो जीवन है। जब भी तुम उनसे जुड़ते हो, तुम पाओगे की तुम ताज़ा और जीर्णोद्धारित हो गए, निपटने के लिए जो भी जीवन तुम्हारी ओर फेंकेगा वो दिन का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है।अगर उसका प्रकाश हमारे हृदय में ना चमके तो हम खो जायेंगे।उससे खोज लो क्योंकि वो चीज़ है जो हमें करनी ही है इतना कुछ ना पकड़ कर बैठ जाओ कि कुछ व्यर्थ धारण के प्रयास में जीवन की रेखाएं तुम्हारी उँगलियों से फिसल जाए। उसे उसे कस के पकड़ो जो महत्वपुर्ण है। याद रखो की जब भी तुम थका हुआ महसूस करो, जब भी तुम्हारे हृदय डूबा हुआ महसूस करे, एक ताज़ा करने वाली सांस लेना, और बस आँखें बंद कर लेना और पूरे दिल से अपने परमात्मा और गुरु का धन्यवाद करना उन चमत्कारों के लिए जो तुम्हारे जीवन में उत्पन होने वाले हैं। तुम पाओगे तुम चेतना की नए स्तर को पर कर चुके हो।यह वही स्थान हैं जहां पर तुम उन्हें मिल पाओगे।यह वही स्थान है जहां और मैं और कई और तुम्हारा इंतिज़ार कर रहे हैं।साँसों के बीच का अंतराल, विचारों के बीच के क्षण, जागरूकता के बीच की खाई इन्हें भर लेना उसके प्यार और प्रकाश से|आप सबको मेरा आशीर्वाद और प्यारनमः शिवाय इशान शिवानंद
2016-11-28T06:46:35+00:00September 5th, 2016|Blog, Hindi|