कुएँ का मेंढक बनने का समय समाप्त

कुएँ का मेंढक बनने का समय समाप्त

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मैं चाहता हूँ आप इसे अवश्य पढ़ें और अपने हितैषियों के साथ बाँटें
जैसे मैं पर्वतों में चलते हुए और गहरा जाता गया तो मैने एक मेंढक के शाव रूप – टैडपोल से भरा हुआ एक तालाब देखा नवजात मेन्ढक तालाब में तैरते हुए, अपने चारों ओर फैले हुए जंगल से अनभिज्ञ| उनकी तो टाँगें भी ठीक से विकसित नही हुई थी और जो भी संभव हरकत वह कर पा रहे थे, वह उनकी पूंछ हिलाने से हो रही थी|
वे तीव्र गति से तालाब के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक तैरते ही जा रहे थे, अपने आप में इस ज्ञान से संतुष्ट की उन्हें अपने आस पास के संसार का पूर्ण ज्ञान था|
किंतु बहुत जल्द वे विकसित होंगे, पूंछ नही रहेगी, टाँगें नदारद हो जाएँगी, स्वास के आवागमन के लिए बने गिल्स चले जाएँगे और अंततः वे एक व्यस्क मेन्ढक बन जाएँगे| एक व्यस्क जलथलचर एक दिन तलाब से बाहर कूद जाएगा, एक नए संसार से परिचित होगा, नई संभावनाओं से भेंट करेगा जो की केवल उसकी जिज्ञासा से सीमित होंगी|
जो भी टैडपोल आपने इस तालाब में देखे, यह मेन्डक में विकसित हो जाएँगे|
लेकिन दुख की बात यह है की मनुष्य के लिए ऐसा नही कहा जा सकता|
हम सभी मनुष्य टैडपोल की भाँति कर्मों के तालाब में तैर रहे हैं किंतु टैडपोल के विपरीत, युगों युगों से और युगों युगों तक हम वहीं रह जाते हैं, उसी क्षेत्र में, अहंकार के धकेल को न छोड़ते हुए| टैडपोल अहंकार को छोड़ देता है किंतु मनुष्य नही| मनुष्य अपनी सीमित सोच को पकड़े रहता है, टैडपोल जैसा बनने में गर्व लेता हुआ, अज्ञानता के तालाब में तैरता हुआ| केवल कुछ ही ज्ञानी पुरुष इस तालाब से बाहर छलाँग लगा पाते हैं| मेरे पिता ने यह छलाँग लगाई और शुक्र है मैने भी|
जो मैने देखा, वो देख के मुझे बहुत आनंद आया| आप भी मेरी तरह सही दिशा में जा रहे हैं| किंतु इस मार्ग पर केंद्रित रहना आवश्यक है|
याद रहे की एक टैडपोल एक मेन्डक से बहस नही कर सकता|
यकीन कीजिए, मैने टैडपोले के समान मनुष्यों को बहुत समझाने की कोशिशें करी हैं| उनकी बुद्धि सीमित है| ऐसा नही है की वह मंद बुद्धि के हैं| बस ऐसा है की वह विकसित सोच रखने के काबिल नही|
अपना समय ऐसे व्यक्तियों पर बिल्कुल मत बेकार करना क्योंकि यदि आप ज़्यादा ज़ोर लगाएँगे तो आपको बता दिया जाए की उसका कोई फायदा नही है, उनका अहंकार रहेगा वे खुद बेशक़ गायब हो जाएं| उन्हें इस मार्ग पर स्वयं चलना होगा, उनको अपने आप निष्कर्ष निकालने के लिए छोड़ना पड़ेगा|
इसलिए कभी कभी आप अपने सखे और सखियों के लिए केवल प्रार्थना करें जो की कर्म और अज्ञानता के तालाब में अटके हुए हैं| उनसे बहस भी मत कीजिएगा, वो कुछ काम नही आएगी| ज़्यादा उंगली मत कीजिएगा, ऐसा करना ज़ोख़िम उठाने जैसा हो सकता है|
मैने प्रयास किया, सफलता से चूक गया| मैं उन्हें तालाब से बाहर आने में सहायता करना चाहता हूँ और वे तो चाहते हैं की मैं स्वयं तालाब में कूद जाऊँ|
बस बात सिर्फ़ इतनी है की ऐसा करने में मेरी अपनी यात्रा थम जाती है| लेकिन बात यह भी है की एक मेन्डक के समान मेरी यात्रा, तालाब के समीप ही पूरी हो सकती है| इसलिए मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ की टैडपोल से वाद विवाद मत करिए, अपनी यात्रा का आनंद लीजिए, स्वयं की खोज जारी रखिए| अनुभव करने के लिए अजूबे बहुत हैं|
बता देना चाहता हूँ की टैडपोल आपको विकास करने से भ्रमित करेगा, आपको असुखद महसूस करवाएगा अपने विकास के बारे में, यह कह कर की आप तो बदल गये हैं, आप तो तालाब छोड़ दिए हैं| बस ऐसा मत होने देना| अपनी सफलता के बारे में बुरा मत सोचना न उनको सोचवाने देना|
आगे बड़ना, मंज़िलें और भी हैं|
एक नया संसार, आपके जगत से परे, ऐसा कुछ मैं टैडपोल से कहता हूँ| यह भी कहता हूँ की तुम्हारी सीमाएं घट रही हैं, जागो! सूर्योदय हो चला है, तालाब सूख जाएगा आपके जीवन काल में ही| तब कहाँ जाओगे?
उममीद है आप अपनी पूंछ छोड़ दोगे| यही मेरी प्रार्थना है| मेढकों से मैं सिर्फ़ आनंद को बरकरार रखने को कहता हूँ| जीवन बस अभी शुरू हुआ है|
टेडपोलों के साथ मेरा बस हो गया| उनके लिए अब सिर्फ़ प्रार्थना|
विकासशील मेन्ढकों के साथ ईष्ट और गुरु दोनों साथ चल पड़ेंगे|
मेरा आशीश मेरा प्रेम नमः शिवाय
2016-11-28T07:10:27+00:00August 22nd, 2016|Blog, Hindi|